इंकलाब अगस्त 06, 2016 मुठ्ठियाँ तनी हैं, हाथ भी उठे हैं नज़रें हैं सीधी, होंठ खुल रहे हैं बोलो बोलो इंक़लाब, इंक़लाब ज़िंदाबाद बोलो खेत किसके हो? जोते, बोये उसकी हो। फसल पर हक़ किसका हो? ख़ून, पसीना जिसका ह... और पढ़ें